भागलपुर से पटना की दूरी अब 50 किमी. कम पड़ेगी, घोरघट पुल बनने से 7 जिलों को फायदा

पटना : भागलपुर समेत सात जिलों को 16 जनवरी से आवागमन को लेकर काफी फायदा होने वाला है। भागलपुर शहर में घोरघट पुल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। 16 जनवरी को इस पुल का उद्‌घाटन होना है। इस पुल पर वाहनों का परिचालन शुरू होने से कई इलाकों की दूरी घट जाएगी। राजधानी पटना और भागलपुर के बीच की दूरी करीब 50 किलोमीटर कम होगी। पुल नहीं होने के कारण वाहन सवारों को मुंगेर जिला अंतर्गत तारापुर, हवेली खड़गपुर होकर बरियारपुर के रास्ते पटना जाना पड़ता है। इसमें पटना की कुल दूरी 271 किलोमीटर पड़ती है। इसके अलावा एक औ रूट है वह भी काफी लंबा पड़ता है। यह रूट है भागलपुर शहर से नवगछिया होते हुए बेगूसराय, समस्तीपुर होते हुए पटना पहुंचा। इस रूट से भी दूरी 267 किलोमीटर पड़ जाती है। अब घोरघट पुल पर आवागमन शुरू होने से भागलपुर और पटना की दूरी 208 किलोमीटर हो जाएगी। फिलहाल पुराने बेली ब्रिज के जर्जर रहने से और नए पुल का निर्माण चलते रहने से गाड़ियां भागलपुर-पटना के बीच दो दिशाओं में चल रही हैं। इस पुल के चालू होने के बाद भागलपुर, बांका, गोड्‌डा, दुमका, मुंगेर, लखीसराय और पटना के लोगों को जबरदस्त फायदा होगा।

2006 में टूट गया था घोरघट पुल
स्थानीय लोगों ने बताया कि घोरघट पुल 12 जुलाई 2006 को टूट गया था। यह पुल मनी नदी पर बना हुआ है। इसी समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी को सुल्तानगंज श्रावणी मेले का उद्‌घाटन करने जा रहे थे। पुल के टूट जाने से मुख्यमंत्री इस रूट से वापस लौटना पड़ा था। तब सरकार ने पुल पर आवागमन शुरू करने के लिए 2.65 करोड़ रुपए जारी किए थे। इससे उसी साल नवंबर में पुल की मरम्मत शुरू की गई थी। तब से अब तक पुल से बड़े वाहनों के परिचालन पर रोक लगी है। फिलहाल नए पुल का लेबलिंग का काम चल रहा है।

2013 में ही पूरा करना था निर्माण
एनएचएआई के साइट इंजीनियर सुशील कुमार का कहना है कि पुल को बनाने में 11 करोड़ रुपए लगे हैं। नौ साल से पुल का निर्माण कार्य अधूरा छोड़ा हुआ था। इसके बाद पुल निर्माण निगम को काम मिला तो दोबारा निर्माण कार्य शुरू किया गया। जबकि पुल का निर्माण पूरा करने की अंतिम तिथि 24 अक्टूबर 2013 ही थी। मगर, तब तक तीन स्पैन बने भी नहीं थे।

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