लखीसराय में डॉक्टर की मनमानी, दर्द से कराह रही प्रसूता को छोड़ गई चिकित्सक

लखीसराय जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था अक्सर चर्चाओं में रहती है और मीडिया की सुर्खियां तो बनाती ही है साथ में लोगों के चाय पर चर्चे भी बहुत होते हैं इसकी बदहाली के बारे में। ताजा मामला लखीसराय सदर अस्पताल का ही है जहां सिविल सर्जन के कहने के बावजूद भी डॉक्टर साहिबा ने मरीज को देखना उचित नहीं समझा। आइए आपको बताते हैं की पूरा मामला क्या है

खबर शुक्रवार की है जब हलसी प्रखंड अस्पताल से सदर अस्पताल आई एक प्रसूता का इलाज डॉक्टर साहिबा ने नहीं किया। 24 तारीख को हलसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से रेफर होकर सदर अस्पताल आई एक प्रसूता को छोड़कर महिला चिकित्सक चली गई। प्रसूता दर्द से कराह रही थी इसके बावजूद भी डॉक्टर साहिबा ने उसका इलाज तो दूर उसे देखना तक उचित नहीं समझा। ये बातें ही स्वास्थ्य व्यवस्था की सारी पोल खोल देती है जब ऑन ड्यूटी चिकित्सक ही किसी मरीज को नहीं देखती है।

प्रसव वार्ड में कार्यरत कर्मी, नर्स, अस्पताल प्रबंधन के आग्रह व सिविल सर्जन के आदेश के बाद भी महिला चिकित्सक ने पीड़िता का इलाज नहीं किया। इसके बाद करीब 2 घंटे के बाद ए ग्रेड नर्स प्रतिमा कुमारी ने रिस्क लेकर महिला का प्रसव कराया।

लखीसराय के पार्क की स्थिति

प्राप्त जानकारी के अनुसार हलसी प्रखंड के सेठना गांव के विपिन कुमार अपनी 20 वर्षीय पत्नी अनीशा भारती को प्रसव पीड़ा होने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया था जहां प्रभारी डॉक्टर राजेश भारती ने बताया कि महिला का वाटर डिस्चार्ज हो गया था और बच्चे का साउंड भी कम आ रहा था। इस तरह की स्थिति में उक्त अस्पताल में व्यापक व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीज को सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया।

सदर अस्पताल पहुंचने के बाद प्रसव वार्ड में कार्यरत प्रभारी अपर्णा सिन्हा, शकुंतला देवी, और अंजू कुमारी ने ऑन ड्यूटी चिकित्सक डॉ ज्योत्सना कुमारी को मरीज की गंभीर स्थिति की जानकारी दी। मगर डॉक्टर साहिबा ने मरीज को देखने से इंकार कर दिया।

स्वास्थ्य कर्मी ने अस्पताल प्रबंधन और सिविल सर्जन को मामले की जानकारी दी। जिसके तुरंत बाद सीएस डॉ डीके चौधरी ने फोन कर अस्पताल प्रबंधन व डॉ ज्योत्सना से संबंधित मरीज का इलाज करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद भी डॉ ज्योत्सना कुमारी ने मरीज का इलाज नहीं किया।

डॉक्टर ज्योत्सना मरीज को बिना देखे साढ़े 12 बजे वापस चली गई। जिसके बाद दोपहर साढ़े 3 बजे के आसपास ए ग्रेड नर्स के माध्यम से मरीज का नॉर्मल डिलीवरी कराना सुनिश्चित हुआ।

एक मामला 10 दिन पूर्व का भी है जहां डॉक्टर ज्योत्सना ने एक प्रसव पीड़ित महिला के परिजन से ही बेहोसी की डॉक्टर की व्यवस्था करने की बात कहकर सिजेरियन डिलीवरी से मना कर दिया था जिसपर अस्पताल प्रबंधन ने कार्रवाई की बात कही थी।

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